कागजों में मालिक,हकीकत में बेघर मुसहर परिवार



55 साल से न्याय की आस में मुसहर परिवार


पट्टे की जमीन पर कब्जा न मिलने से अधूरा है मुसहर परिवारों का आशियाने का सपना

खुटहन (जौनपुर)। सरकारी अभिलेखों में जमीन उनकी है, आवास योजना भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन हकीकत यह है कि बड़नपुर गांव के मुसहर परिवार आज भी अपने सिर पर पक्की छत के लिए तरस रहे हैं। वर्ष 1972 में मिले पट्टे के 55 वर्ष बाद भी उन्हें अपनी जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है, जिससे उनका आशियाना बनाने का सपना अधूरा पड़ा हुआ है।
विकास खंड खुटहन के बड़नपुर गांव में अनुसूचित जनजाति मुसहर समुदाय के कई परिवारों को शासन द्वारा कृषि एवं आवासीय उपयोग के लिए भूमि आवंटित की गई थी। राजस्व अभिलेखों में आज भी उनके नाम दर्ज हैं, लेकिन कथित दबंगों के कब्जे के कारण लाभार्थी भूमि का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

 विडंबना यह है कि मनीता पत्नी अजय और पूनम पत्नी तुलसु के नाम मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हो चुका है। बावजूद इसके जमीन पर कब्जा न होने के कारण वे घर का निर्माण नहीं करा सकी हैं। दोनों परिवार आज भी अस्थायी और असुरक्षित आवासों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से तहसील, ब्लॉक और राजस्व विभाग के अधिकारियों से लेकर उच्चाधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। शिकायतों और प्रार्थना-पत्रों का सिलसिला जारी रहा, मगर जमीन पर कब्जा दिलाने की कार्रवाई प्रभावी रूप से नहीं हो सकी।
यह मामला केवल भूमि विवाद का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत का भी है। जब लाभार्थियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं और आवास योजना का लाभ भी स्वीकृत हो चुका है, तब भी उन्हें अपने अधिकार से वंचित रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पट्टाधारकों को उनकी भूमि पर तत्काल कब्जा दिलाया जाए, ताकि पांच दशक से अधिक समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार सम्मानपूर्वक अपना घर बना सकें।

रिपोर्ट संतलाल सोनी 


-

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

और नया पुराने

Powerd by शिवसेन्द्र यादव पत्रकार खुटहन 9415938557



 


نموذج الاتصال